भारत में व्यावसायिक शिक्षा का विकास और फोर्ड फाउण्डेशन का योगदान
1947 में ब्रिटिश साम्राज्य से आजादी मिलने के बाद भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ग्रामीण भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास की समस्याओं को दूर करने के लिये कुछ नये विचारों को तलाश रहे थे। इस बीच उन्होंने ‘कम्युनिटी डेवलेपमेंट’ के संबंध में इटावा में चल रहे प्रयासों (जो कि फोर्ड फाउण्डेशन के न्युयार्क कार्यालय के आरम्भिक सहयोग से शुरू किया गया था) के बारे में सुना। इन्हीं अनभवों के आधार पर 1952 में प्रथम पंचवर्षीय योजना की शुरूआत के साथ ही‘ कम्युनिटी डेवलेपमेंट’ भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम बना। देश की दूसरी पंचवर्षीय योजना के माध्यम से ‘कम्युनिटी डेवलेपमेंट’ को पूरे देश में लागू किया गया। इस बीच पंडित नेहरू के द्वारा 1952 में फोर्ड फाउण्डेशन को भारत में अपना कार्यालय खेलने के लिये भी आमंत्रित किया गया।
1965 में जब तत्कालीन प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री के द्वारा देश में खाद्यान्न उपज को बढ़ाने और भुखमरी को मिटाते हुये विदेशों से आयोत किये गये अनाज पर निर्भरता को कम करने की जरूरत महसूस की गयी तो उनके द्वारा भारतीय कृषि के आधुनिकीकरण का काम शुरू किया गया जिसे बाद में ‘हरित क्रांति’ के रूप में पहचान मिली। विश्व प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और भारतीय हरित क्रांति के अग्रणियों में से एक डा0 एम.एस.स्वामीनाथन द्वारा देश में कृषि विश्वविद्यालयों के द्वारा किये जाने वाले कृषि अनुसंधान के काम में फोर्ड फाउण्डेशन के द्वारा उदारता पूर्वक दिये गये सहयोग की सराहना की।
1960 में फोर्ड फाउण्डेशन के सहयोग से ही भारत में आधुनिक मैनेजमेंट शिक्षा को लाया गया। आज से लगभग आधी शताब्दी पहले भारतीय प्रबंधन संस्थानों में शैक्षणिक विकास के काम में डा0 रवि मथाई (आई.आईएम. अहमदाबाद) और डा0 कमला चैधरी (फोर्ड फाउण्डेशन में कार्यक्रम अधिकारी) ने प्रमुख भूमिका निभाई। इसके तुरन्त बाद डा0 कुरियन (अमूल से जुडे) के अनुरोध पर डा0 चैधरी (और फोर्ड फाउण्डेशन) के सहयोग से ग्रामीण प्रबंधन संस्थान आणन्द, गुजरात (इन्स्टीट्युट आॅफ रूरल मैनेजजमेंट आणन्द- इरमा) की स्थापना हुई।
1980 के दशक में भारतीय शैक्षणिक संस्थानों में व्यावसायिक शिक्षा के अनेक पाठ्यक्रमों ने फोर्ड फाउण्डेशन के सहयोग से अपनी विशिष्ट पहचान बनायी। दिल्ली के इन्स्टीट्युट आॅफ इकोनाॅमिक ग्रोथ (आई.ईजी.) ने भी इसी प्रकार के सहयोग से अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अनुसंधान करने के संबंध में अपनी कुशलता को बढ़ाया। फोर्ड फाउण्डेशन के निरन्तर सहयेाग से मुम्बई में टाटा इन्स्टीट्युट आॅफ सोशल साइन्सेस (टी.आई.एस.एस.) ने ग्रामीण विकास से संबंधित क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आरम्भ किये। 1960 - 80 के बीच फोर्ड फाउण्डेशन के सहयोग से पहली बार एम. एस. विश्वविद्यालय बडौदा में पोषण (न्यूट्रिशन) को वैज्ञानिक अनुसंधान और व्यवसायिक शिक्षा के एक क्षेत्र के रूप में मान्यता मिली।
1980 के दशक के मध्य में स्वर्गीय राजीव गांधी की सरकार के द्वारा बंजर भूमि विकास कार्यक्रम और सामुदायिक वानिकी कार्यक्रम आरम्भ किया गया। इस कार्यक्रम की सफलता तीस वर्षाें के बाद महसूस की गयी जब देश के अनेक हिस्सों में हरियाली में वृद्धि दिखायी दी। नेहरू फाउण्डेशन फाॅर डेवलपमेन्ट (अहमदाबाद), वाइल्डलाइफ इन्स्टीट्युट आॅफ इंडिया (देहरादून) और इंडियन काउन्सिल आॅफ फाॅरेस्ट्री रिसर्च जैसे कुछ संसथान हैं जिन्होंने सामुदायिक वानिकी के क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान के कामों के लिये फोर्ड फाउण्डेशन से सहयोग प्राप्त किया है।
भारत सरकार के द्वारा जब 1980 के आरम्भ में महिला सशक्तिरण के लिये विकास संबंधी नीतियों और कार्यक्रमों की शुरूआत की गयी तो फोर्ड फाउण्डेशन के सहयोग से एस.एन.डी.टी. मुम्बई जैसे अनेक विश्वविद्यालयों में जेंडर विषय पर शिक्षा और अनुसंधान की क्षमताओं को बढ़ाने में मदद मिली। इसी प्रकार शहरी नियोजन और विकास के विषय पर अनुसंधान करने हेतु कई संस्थानों को फोर्ड फाउण्डेशन की मदद मिली (नेशनल इन्स्टीट्युट आॅफ अरबन अफेयर्स और स्कूल आॅफ प्लानिंग एण्ड आर्किटैक्चर प्रमुख हैं)।
1990 के आरम्भिक वर्षाें में नेशनल लाॅ स्कूल आॅफ इंडिया की स्थापना के बाद से देश में कानून की नयी शिक्षा प्रणाली, नये पाठ्यक्रमों के विेकास और अध्यापन के नये तरीकों का विकास हुआ। आज कानून को पढ़ाने की नई विधियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की बदलती परिस्थितियों के आधार पर कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये कानूनविदों की एक नई पीढी तैयार हो रही है। इस प्रकार के प्रयासों में फोर्ड फाउण्डेशन के सहयोग की सराहना कानूनी शिक्षा जगत से जुड़े लोगों के द्वारा आरम्भ से ही की जाती रही है।
व्यावसायिक शिक्षा के अनेक क्षेत्रों को फोर्ड फाउण्डेशन के द्वारा दिये जा रहे सहयोगों का लाभ मिला है। फोर्ड फाउण्डेशन के सहयोग से भारतीय शैक्षणिक जगत के विभिन्न क्षेत्र के अनेक विद्वानों को दुनियों के दूसरे देशों में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठियों में अपने कामों को बता कर पहचान बनाने और दूसरे से सीखने के अवसर प्राप्त हुये हैं। इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि जब भी भारत सरकार की नीतियों को आवश्यकता महसूस हुई तब फोर्ड फाउण्डेशन के सहयोग से व्यवसायिक शिक्षा के नये क्षेत्रांे की देश में स्थापना हो सकी।
इन सबको ध्यान में रखते हुये यह महत्वपूर्ण है कि फोर्ड फाउण्डेशन जैसे अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा देश में प्रोफेशनल्स की क्षमताओं को बढ़ाने में दिये गये योगदान को वर्तमान के कुछ विवादित गतिविधियों और परियोजनाओं को सहयोग दिये जाने के नाम पर भूला न दिया जाय। सहयोग की विभिन्न गतिविधियों में फोर्ड फाउण्डेशन को एक माॅडल के रूप में देखा जाना चाहिये जिसने समय पर सहयोग उपलब्ध कराकर देश में ज्ञान और व्यावसायिक शिक्षा के नये क्षेत्रों के विकास में मदद उपलब्ध कराकर देश को अपने विकास के चुने हुये पथ पर आगे बढ़ने का अवसर दिया।
डा0 राजेश टंडन, 23 अप्रैल, 2015
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