स्मार्ट सिटी, डेवलप्ड सिटी, मेट्रो सिटी जैसी कई अवधारणायें, जो किसी शहर की कल्पना को मूर्त रूप देती है, शहरों को उनका स्वरुप प्रदान करती है I


31 अक्टूबर को विश्व शहर दिवस के अवसर पर प्रिया संस्था द्वारा समावेशी शहर की थीम पर मुजफ्फरपुर शहर में सप्ताह व्यापी अभियान में अलग-अलग कार्यक्रमों के माध्यम से शहरों में सतत विकास और समावेशी शहर की अवधारणा पर चर्चा की गयी I इसी क्रम में हमारी आने वाली पीढ़ी शहरी विकास को किस रूप में देखती है, उनके सपनों का शहर कैसा हो जहाँ वे रहना चाहते है, विषय पर पेंटिंग का कार्यक्रम आयोजित किया गया I मुजफ्फरपुर स्थित जुब्बा साहनी पार्क में अलग- अलग आयु वर्ग के बच्चों ने पेंटिंग के माध्यम से अपने सपनों के शहर को उकेरा I इस कार्यक्रम में स्लम बस्तियों तथा शहर की सामान्य बस्तियों के बच्चों ने एक साथ पेंटिंग की I

कक्षा सातवीं की छात्रा करीमा प्रवीण ने दो अलग -अलग पेंटिंग बनायीं, जिनमें से एक में अभी के शहर की तस्वीर थी और दूसरी में उनके सपनों के शहर की I करीमा कहती है की, “दो अलग अलग चित्र हमें यह समझने में मदद करेंगे कि, अगर सब कुछ अच्छा हो जाएगा तो तस्वीर कितनी बदल जाएगी I ज्यादा कुछ तो नहीं चाहिए ,अच्छी सड़क हो, और उनके किनारे पक्की नालियाँ जिससे की बरसात में गंदे पानी में घुसकर स्कूल नहीं जाना पड़े I सबके घर पर पानी का नल हो, घरों के आगे अच्छे सुन्दर फूल और पेड़ हो I कचरा भी सड़क पर इधर उधर फेंका नहीं हो I इतना भी हो जाएगा तो हमारा शहर साफ़ सुथरा होगा I” कुल मिलाकर देखा जाए तो करीमा के सपनों का शहर साफ़ सुथरा शहर होगा I


शहरों की वर्तमान स्थिति

                                                                           

 करीमा के सपनों का शहर



मोहम्मद महफूस ने अपनी पेंटिंग में एक ऐसे शहर की कल्पना की है, जिसमें पक्की सड़कें और नालियाँ तो होंगी, साथ ही साथ वहाँ सामुदायिक शौचालय और स्कूल भी होगा I महफूस कहते है कि, “मेरे सपनों का शहर इतना सुरक्षित होगा कि वहाँ लड़कियों को स्कूल या बाजार जाने से पहले सोचना नहीं होगा I एक ऐसा सुरक्षित माहौल जहाँ सभी आजादी से घूम सकते है I”

मोहम्मद महफूस के सपनों का शहर



इस कार्यक्रम में चित्रकारी करने आये देबोजीत ने कहा की, “स्लम के लोगों के लिए सबसे जरूरी घर है, इसलिए मेरे सपनों के शहर में कोई भी सड़क पर नहीं सोयेगा I” वहीँ अंचल ने कहा की, “मेरे सपनों के सहर में मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर सब एक जगह होंगे और हम लोग सारे पर्व एक साथ मनाएंगे I”

   à¤¦à¥‡à¤¬à¥‹à¤œà¥€à¤¤, अंचल और साथियों की नजरों से उनके सपनों का शहर


मुस्कान ने अपने सपनों के शहर में हर घर के आगे पानी के नल की परिकल्पना को उकेरा I शुभम कुमार ने कहा कि, “सपनों के शहर में बच्चों के लिए स्कूल और अस्पताल उनके घर के आस पास ही मौजूद होने चाहिए I”

सपनों का शहर जो टिकाऊ होगा, और प्रदूषण मुक्त होगा