आज सम्पूर्ण भारत में विकेन्द्रीकृत सहभागी नियोजन (Decentralized Participative Planning) के तहत ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) का निर्माण किया जा रहा है| GPDP के आधार पर ही चौदहवें वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग द्वारा सीधे पंचायतों के खाते में राशि उपलब्ध करवाई जा रही है| पंचायतों को यह राशि वहां की जनसंख्या, क्षेत्रफल एवं स्वयं के वित्तीय स्रोतों को ध्यान में रखते हुए प्रदान किया जाता है| GPDP के अवलोकन के दौरान यह पाया गया है कि इनमें ज्यादातर निर्माण कार्यों के प्रस्ताव लिए जाते है एवं अन्त में दिखाने के लिए इनमें कुछ मानव विकास एवं सामाजिक न्याय से जुड़े कार्य जोड़ दिए जाते है, जिन्हें "लो कॉस्ट - नो कॉस्ट" गतिविधियों के नाम से जाना जाता है और यही हमारी इस कहानी का शीर्षक है|

इस शीर्षक से पहली बार हमारा सामना दिनांक 30 जुलाई 2018 को हुआ, जब हमने इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान, जयपुर में GPDP की एक अनुभव साझा कार्यशाला (Experience Sharing Workshop) में भाग लिया| यहाँ पधारे सरपंच साहेबान ने अनौपचारिक चर्चा के दौरान हमें बताया कि पंचायतों का मुख्य कार्य अपने क्षेत्र में आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करना है, पर केवल 01 प्रतिशत सरपंच ही ईमानदारी से यह कार्य कर पाते है| कारण पूछने पर उन्होंने बताया कि सरपंच का चुनाव à¤œà¥€à¤¤à¤¨à¥‡ के लिए किसी भी व्यक्ति को औसतन 5 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते है और जब वह जीत जाता है तो उसकी चिंता इन 5 लाख रुपयों को वसूलने की होती है| इसके लिए वह अपने ग्राम पंचायत में ज्यादा से ज्यादा निर्माण कार्य करवाना चाहता है, क्योंकि इसी से उसे पैसे मिलते है| इसलिए जब भी GPDP का प्रस्ताव तैयार किया जाता है तो सरपंच उसमें ज्यादा से ज्यादा निर्माण कार्यों को जोड़ने का प्रयास करता है| नियोजन के दौरान सारा पैसा निर्माण कार्यों पर खर्च करने के पश्चात जब उनके पास और राशि नहीं बचती तो वे ऐसी गतिविधियों का चयन करते है जिनमें कोई राशि खर्च न हो और न ही उनके अंकेक्षण (Audit) की आवश्यकता हो| इन्हीं कार्यों को विभागीय भाषा में "लो कॉस्ट – नो कॉस्ट (बिना एवं कम लागत)" गतिविधियाँ कहा जाता है|

अब सारा मामला हमें स्पष्ट था| हमने तय किया की हम इस 'लो कॉस्ट - नो कॉस्ट' शब्द को ढाल बनाकर GPDP में मानव विकास के कार्य जैसे - आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ, पोषण, स्वच्छता, सामाजिक न्याय आदि को शामिल करवाने का प्रयास करेंगे| हमारे कार्यक्षेत्र बाँसवाड़ा एवं गोविन्दगढ़ (जयपुर) के प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामाजिक न्याय समिति (SJC) तथा ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल एवं पोषण समिति (VHSWNC) की संयुक्त बैठकों का आयोजन करते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा एवं स्वच्छता से जुड़े उन मुद्दों की पहचान की गई है जिन्हें GPDP में जगह मिलनी चाहिए, किन्तु वे अब तक इसमें शामिल नहीं है| इन मुद्दों को 15 अगस्त की ग्राम सभा के माध्यम से GPDP में शामिल करवाने के लिए हमने राज्य शासन स्तर पर पैरवी (advocacy) करने का निर्णय लिया, ताकि पंचायती राज विभाग द्वारा सभी जिलों को ग्राम सभा के एजेंडे के संबंध में लिखे जाने वाले पत्र में 'लो कॉस्ट - नो कॉस्ट' गतिविधियों पर चर्चा करने का उल्लेख हो| इस उद्देश्य के साथ सर्वप्रथम हमने श्री सी.एम मीना, संयुक्त सचिव (प्लान), पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार से मुलाकात की एवं उन्हें इस आशय का एक पत्र सौपा| उन्होंने हमें बताया कि इसके लिए हमें उनके स्थान पर श्री कुंजी लाल à¤®à¥€à¤¨à¤¾ (IAS), सचिव एवं आयुक्त, पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार को पत्र लिखना होगा तथा उनकी स्वीकृति के पश्चात ही इस आशय का पत्र विभाग द्वारा जारी किया जा सकेगा| अतः हमने श्री कुंजी लाल à¤®à¥€à¤¨à¤¾ जी से मिलने का कार्यक्रम बनाया एवं दिनांक 03 अगस्त 2018 को उनसे पहली मुलाकात की| उन्होंने हमसे कहा की हम उन गतिविधियों की सूचि तैयार करें जिन्हें 'लो कॉस्ट - नो कॉस्ट' गतिविधियों के रूप में GPDP में शामिल किया जा सकता है, साथ ही उन्होंने इनकी अनुमानित लागत निकालने के लिए भी कहा| à¤®à¥€à¤¨à¤¾ जी के निर्देशानुसार आवश्यक सूची तैयार करते हुए हमने पुनः दिनांक 06 अगस्त को उनसे मुलाकात की| हमारे द्वारा तैयार की गई सूची की सराहना करते हुए उन्होंने इसे आगे की कार्यवाही के लिए श्री मुकेश महेश्वरी, अधीक्षक अभियंता (परियोजना), पंचायती राज विभाग, राजस्थान सरकार को मार्क कर दिया|

इसे आप विडम्बना ही कह सकते है, क्योंकि पेशे से इंजीनियर होने की वजह से महेश्वरी जी की भी रूचि निर्माण कार्यों के प्रति ज्यादा थी| हमारी फाइल उनके पास कुछ दिनों तक पड़ी रही और दिनांक 9 अगस्त को हमारे फॉलोअप करने के पश्चात दिनांक 10 अगस्त को उन्होंने यह कहते हुए उस पत्र को श्री सी.एम à¤®à¥€à¤¨à¤¾ जी को मार्क कर दिया की अब समय निकल चुका है और हमें इन मुद्दों को GPDP (2019-20) में शामिल करवाने का प्रयास करना चाहिए| सच में 15 अगस्त की ग्राम सभा में इन मुद्दों को शामिल करवाने का समय तो निकल चुका था पर हमारे सामने GPDP (2019-20) के रूप में एक बड़ा मौका उपलब्ध था, जिसकी तैयारी 02 अक्टूबर 2018 से प्रारंभ हो रही थी| अतः हमने पुनः विभागीय स्तर पर संपर्क आरंभ लिया| इस दौरान हमने श्री सी.एम मीना, à¤¸à¤‚युक्त सचिव (प्लान), श्री पी.आर. शर्मा (सलाहकार) तथा श्री नीरज झा (सलाहकार-आईईसी) से कई मुलाकातें की एवं उन्हें इस बात पर सहमत (Convince) किया कि जब तक विभाग द्वारा राज्य स्तर से GPDP में 'लो कॉस्ट - नो कॉस्ट' गतिविधियों को शामिल करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी नहीं किये जायेंगे, तब तक पंचायत स्तर पर इन्हें सिर्फ खानापूर्ति की तरह इस्तेमाल किया जायेगा| अंततः सभी के सामूहिक प्रयासों से दिनांक 20 अगस्त 2018 को सभी कलेक्टर्स के लिए श्री राजेश्वर सिंह (IAS), प्रमुख शासन सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, राजस्थान सरकार के द्वारा हिन्दी में एक पत्र (PRD/DP/GPDP/2019-20/883) जारी किया गया, जिसके ऊपर अंग्रेजी भाषा में लिखा गया था, "Most Urgent"| इस पत्र के कुछ अति महत्वपूर्ण निर्देश इस प्रकार है:

  1. वर्ष 2018-19 की GPDP के अवलोकन के दौरान यह पाया गया है कि ज्यादातर निर्माण कार्यों के प्रस्ताव लिए गए है| वर्ष 2019-20 की GPDP में मानव विकास के कार्य जैसे - आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, सामाजिक न्याय इत्यादि कार्य परिलक्षित होने चाहिए|
  2. पिछले वर्ष की ग्राम पंचायत विकास योजना में पंचायतों द्वारा केवल 14 वें वित्त आयोग एवं पंचम राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि का ही प्लान बनाया गया है| अतः यह सुनिश्चित करें कि वर्ष 2019-20 की GPDP में 14 वें वित्त आयोग, राज्य वित्त आयोग, निजी आय, नरेगा एवं हस्तांतरित विभागों यथा शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, महिला बाल विकास, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के साथ अन्य विभाग जिनकी गतिविधियां ग्राम पंचायत तक क्रियान्वित की जाती है, उन्हें भी GPDP में शामिल करना है|
  3. ग्राम पंचायत विकास योजना के निर्माण हेतु समुदाय में जागरूकता एवं सहभागिता बढ़ाने हेतु ग्राम विकास अधिकारी एवं सरपंच तथा वार्ड पंच के सहयोग से माह जनवरी, 2019 से पूर्व प्रत्येक वार्ड से एक महिला एवं एक पुरुष को स्वैच्छिक सदस्य के रूप में चिन्हित करेंगे, जो अपने वार्ड की आवश्यकताओं की पहचान करेंगे तथा ग्राम सभा में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी के लिए जागरूकता लायेंगे|
  4. ग्राम पंचायत स्तर से अपनी ग्राम पंचायत में योजना निर्माण हेतु प्रचार-प्रसार किया जावे| इसके लिए पैम्पलेट छपवाना, नुक्कड़ नाटक, लाऊड स्पीकर, दीवार लेखन, डोडी पिटवाना, अखबार, नोटिसबोर्ड पर चस्पा, विद्यालय में प्रार्थना सभा में बच्चों को जानकारी देना, सोशल मीडिया जैसे - व्हाट्सएप्प, फेसबुक इत्यादि माध्यमों द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार किया जावेगा|
  5. महिला स्व-सहायता समूह एवं महिला फोरम, महिलाओं को ग्राम सभा में अधिक से अधिक भागीदारी हेतु जागरूक कर उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे|
  6. ग्राम पंचायत विकास योजना के निर्माण के वातावरण के दौरान बिना एवं कम लागत (low cost - no cost) की गतिविधियों जैसे- बाल अधिकार, जेन्डर, बेटी बचाओ - बेटी पढाओं, बाल विवाह की रोकथाम, स्वच्छ भारत मिशन, सम्पूर्ण टीकाकरण इत्यादि का भी प्रचार-प्रसार एवं जागरूक करेंगे तथा साथ ही इन मुद्दों से संबंधित गतिविधियों का आकलन करेंगे|

 

अंग्रेजी में एक कहावत है "Well begun is half done" अथार्त "अच्छी शुरुआत तो आधा काम पूरा"| हम कह सकते है कि GPDP (2019-20) के निर्माण के लिए एक अच्छी पहल हुई है, पर अभी हमें मीलों आगे जाना है| आशा है GPDP (2019-20) के निर्माण के दौरान और कई सफल कहानियों को लिखने का मौका मिलेगा|