बढ़ते शहरीकरण,का दबाव सबसे अधिक स्वच्छता सेवाओं पर पड़ रहा है जिससे शहर में कई प्रकार की समस्यायें बढ़ रही है । भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान का प्रभाव तो पड़ रहा है,किन्तु यह स्थाई रहे इसके लिए अनियमित बस्तीयों स्लम क्षेत्रों व कालोनीयों में रहने वाले मध्यम व उच्च वर्ग के लोगों के बीच एक बेहतर रिश्ता व आपसी संवाद होना व सभी लोगों को मिलकर कार्य करना आवश्यक है तभी हम समावेशी विकास की बात कर सकते हैं।शहरी शासन के माध्यम से शहरों को समावेशी विकास का केन्द्र बनाया जाय इस पृष्ठभूमि के तहत कार्य करने पर सही मायने में शहरों की तस्वीर बदल सकती है।

बेहतर शहर व बेहतर जीवन के उद्देश्य के साथ संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व में प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को विश्व शहर दिवस के रूप में मनाया जाता है। à¤‡à¤¸ वर्ष 2017 में सामाजिक समावेश को ध्यान में रखते हुए व शहरीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका को दिखाने के लिए विश्व शहरी दिवस का विषय इनोवेटिव गवर्नेंस,ओपेन सिटीज रखा गया है जिसका अर्थ है शासन में नयापन व शहरी ब्यवस्था में खुलापन। इस थीम को लेकर नगर निगम झंसी व युरोपियन यूनियन के सहयोग से सक्रिय नागरिक क्रियाशील शहर कार्यक्रम अन्र्तगत स्वच्छता सेवाओं के स्थायी समाधान व जनसहभागिता के साथ ब्यवहार परिवर्तन हेतु 31 अक्टूबर से प्रिया-सी द्वारा सप्ताहव्यापी अभियान संचालित किया गया जिसके तहत सर्वप्रथम 04 प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों के माध्यम से 4000 पम्फलेट्स वितरण, शहर क्षेत्र में किया गया जिसे शहरी क्षेत्र के नागरिकों ने पढ़ा और गरीबों की भलाई व अनियमित बस्तीयों में रहने वाले लोगों के प्रति संवेदित हुए।

इसी कड़ी में अभियान का आगाज शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के पार्कों में सुबह और शाम में आने वाले नागरिकों के साथ वार्ता व पम्फलेट्स वितरण करके किया गया तथा जरा सोचें पम्फलेट से जुड़े विषयों पर चर्चा किया गया जिसमें मुख्यतःनिम्न बातें शामिल थीं ।
 आप सोचें शहर में आपके नजदीक जो लोग रहते हैं हमें सेवायें देते हैं जैसे-घर में काम करने वाली बाई,सफाईकर्मी,कचरा ले जाने वाले लोग,दूध देने वाले यदि नहीं हों या कहीं दूर रहते हों तो हमारे जीवन शैली पर क्या प्रभाव पड़ेगा,
 क्या उनके बच्चे आपके बच्चे जैसे जीवन जीते हैं
 क्या उनके परिवार के सदस्यों को शिक्षा व स्वास्थ्य की उचित ब्यवस्था मिलती है

उपरोक्त बिन्दुओं को लेकर शहर के मध्यमवर्गीय व सम्पन्न परिवारों वाले कालोनियों,ब्यवसायियों तथा शैक्षणिक संस्थानों आदि के सामने स्लम क्षेत्र के मुद्दों को लाने तथा विकास के कार्य पर पहल करने हेतु अभियान को गति प्रदान करते हुए 08 पार्कों,सरकिट हाउस,रेलवे इंस्टीच्यूट,कालेज,में सम्पर्क करके 650 से अधिक लोगों से सम्पर्क व वार्ता किया गया साथ ही पर्चे वितरित किये गये, इस दौरान नागरिकों ने निम्नलिखित प्रतिक्रियायें ब्यक्त कीं
नागरिकों की प्रतिक्रियायें--
 पार्को में कई नागरिकों ने पूछा कि ये विश्व शहर दिवस क्या है और क्यों होता है
 कुछ लोगों ने कहा कि स्लम क्षेत्र में शिक्षा नहीं है हम एक दो बार अपने क्षेत्र के बगल में बच्चों को पढ़ाने के लिए गये लेकिन न तो बच्चों ने ना ही अभिभावकों ने रूचि दिखायी
 यह प्रयास अच्छा है हम रिटायर्ड पर्सन घर रहकर इस उम्र में क्या व कैसे कर सकते है हम तो यहंा योग करते हैं,टहलते है,भजन करते हैं,अखबार पढ़ते हैं
 अधिकांश पार्कों में रिटायर्ड पर्सन के अनौपचारिक समूह है जिनसे संवाद हो सकता है
 स्लम क्षेत्रों में स्वास्थ परीक्षण का कार्य करवाया जा सकता है
 आप लोग अच्छा कार्य कर रहे हैं हम भी अपने क्षेत्र में गरीबों के लिए जागरूकता का कार्य करेगें
 प्रिया का इस प्रकार से ब्यवहार परिवर्तन के लिए किया जाने वाले प्रयास नया व बेहतर है यह पहली बार हो रहा है
 शहर अब साफ तो दिखता हैं लगता है आप सभी का भी प्रयास है

01 नवम्बर में अभियान से बुन्देलखण्ड विश्व विद्यालय के जनसंचार व पत्रकारिता विभाग के 22 स्नातक विद्यार्थी जुड़े और उन्होनें 02 क्षेत्रों का भ्रमण करके बस्ती के लोगों के दैनिक जीवन को महसूस करते हुए लोगों से शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार की स्थितियों पर वार्ता किया तथा अपने सुझाव भी दिये। इसी प्रकार
02व 3 नवम्बर में विश्वविघालय के समाजकार्य विभाग के 20 विघार्थी व लेक्चरर्स द्वारा 02 वार्डों के 02 बस्तीयों (तालपुरा) में बस्ती के हालात को जानने का प्रयास किया गया जंहा बस्ती के लोगों ने रोजगार की स्थिति,शिक्षा व स्वच्छता,शौचालय से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा किया तथा घरों में रहन सहन की स्थिति का अवलोकन किया। 03 नवम्बर को वार्ड संख्या 08 के नादन झाड़ू वाली बस्ती में सामान्य कालोनीयों व मार्केट,मीडीया शिक्षक सदस्यों ने बस्ती वासियों से भेंट करके संवाद स्थापित किया तथा लोगों की समस्याओं पर संवेदित होकर कुछ प्रयास करने की बात कही तथा रोजगार हेतु बैंक की योजनाओं को लेकर चर्चा किया ।

आगे अभियान की इस कड़ी में अन्य दिनों में राजकीय पालीटेक्निक कालेज व शहर के अन्य क्षेत्रों में मुद्दे पर चर्चा किया गया और पोस्टर्स भी चिपकाये गये ।
07 नवम्बर, 2017 को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के जनसंचार व पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियांे, प्राध्यापक, बस्तीविकास समिति के सदस्य,मीडीया पर्सन,प्रिया टीम तथा विभाग के विभागाध्यक्ष सहित लगभग 70 प्रतिभागीयों के साथ विद्यार्थियों द्वारा बिजौली स्लम क्षेत्र से प्राप्त अवलोकन के बिन्दुओं पर चर्चा किया गया विद्यार्थियों ने 02 समूहों में पावर प्वाइन्ट प्रस्तुतिकरण,कविता,रिपोर्ट के माध्यम से अपनी बातें रखीं कार्यक्रम के आरम्भ में सक्रिय नागरिक व क्रियाशील शहर परियोजना व प्रिया के कार्यों के बारे में सुधीर कुमार ने जानकारी प्रदान किया तथा विश्व शहर दिवस अभियान अन्र्तगत किये गये प्रयासों पर चर्चा किया गया।इसके पश्चात छात्रों के 06 सदस्यीय एक समूह जिन्होनें अपने समूह का नाम बैक बेन्चर्स रखा था ने पावर प्वाइन्ट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से अपने अवलोकन के बिन्दुओं को रखा जिनमें स्लम किसे कहते हैं को चित्रों व वाक्यों के माध्यम से बताने का प्रयास किया गया और बताया गया कि स्लम में गरीबी,जोखिम,रोजगार विहिन लोग रहते हैं,यंहा पर स्वच्छता,बिजली,पानी आदि की समस्या रहती है कम स्थान पर अधिक लोग रहते हैं अशिक्षा व बाल श्रम,बाल विवाह होता है,इनकी पहचान भी अन्य समाज में नहीं रहती है,स्लम बनने के कारणों पर अपनी बात कहते हुए छात्र मोहित ने कहा कि शहरों में रोजगार के अवसर,श्रम बाजार का शहरों में होना तथा कृषि क्षेत्र में बदलाव,जैसे कारणों से स्लम क्षेत्र बनते हैं,परिणाम स्वरूप आर्थिक तंगंी की स्थिति में लोग रहते हैं । इन स्थितियों के समाधान हेतु सुझाव देते हुए बताया गया कि बिजौली जैसी बस्तीयों मे वहीं बस्ती में ही अच्छे तरीके से लोगों को ब्यवस्थित करना चाहिए,बस्ती में जल आपूर्ति,जल निकासी,शिक्षा व स्वास्थ्य की देखभाल के लिए ब्यवस्था होनी चाहिए,हम जैसे नागरिक बस्ती के लोगों को आत्म निर्भर बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं किन्तु बस्ती के विकास व स्थायी समाधान के लिए हमें ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी ब्यवस्था बनानी चाहिए जिससे शहर में पलायन कम हो, बाजारों से सटे क्षेत्रों में कुटीर उधोगों को बढ़ावा देना चाहिए । इस कड़ी में छात्रों के एक दुसरे समूह ने भी पावर प्वाइन्ट प्रस्तुतिकरण में दर्शाया कि स्लम क्षेत्र देश का अंधेरा पक्ष है, स्लम का गहरा रिश्ता गरीबी से है,हमने बिजौली में देखा लेागों के पास आजीविका के ठोस साधन नहीें हैं, महिलायें पर्दें में हैं घूंघट में हैं किन्तु खुले में शौच के लिए जाती हैं,परिवार के सभी सदस्य 7-10 एक ही कमरे में रहते हैं और कई अमीरों के यहां तो उतने हिस्से में बाथरूम बने होते हैं,लोग अशिक्षित हैं और बच्चे भी ठीक से पढ़ाई नहीं करते हैं,हमारा सुझाव यह है कि बच्चे देश का भविष्य हैं हमारा ध्यान व प्रयास बच्चों के साथ होना चाहिए तो भविष्य में बदलाव सम्भव है। बच्चों के शिक्षा की ठोस ब्यवस्था होनी चाहिए। इस प्रस्तुति के पश्चात छात्रा प्रतिक्षा गुप्ता ने एक काव्य पाठ के द्वारा बस्ती के समस्याओं व समाधान पर अपनी बात रखी कविता के बोल निम्न थे-

” मैने बस्ती में जाकर उसके स्तर को अंाका है
एक दिन खाने को रोटी और कई दिन फंाका है
आज उनके दर्द की ब्यथा- कथा बताउंगी
मैनें झुग्गी झोपड़ीयो की ऐसी हालत देखी है
उनके जीवन स्तर में बड़ी गिरावट देखी है
उनकी बस्ती में एक कमरे के छोटे घर होते है
उसमें सास- ससुर बहू बेटा रिश्तेदार भी सोते हैं
घर में बिजली,पानी,खाने और रूपये की तंगी है
लेकिन दारू सिगरेट बीड़ी की ब्यवस्था चंगी है-----
उपरोक्त बोल की कविता के बाद-छात्रा डाली पाण्डे ने अपने कविता में कहा कि
भुखों के लिए नया कानून मंागती हूु मैं
समर्थन में जनता का जुनून मांगती हूं
खुदकुशी या मौत का जब भूखमरी आधार हो
उस जिले का जिलाधीश जिम्मेदार हो ।
भूख से कोई मरे ये हत्या के समान है
हत्याओं के लिए मृत्यु दण्ड का विधान है
कानूनी किताबों में सुधार होना चाहिए
मौत का किसी को जिम्मेदार होना चाहिए ।

इसी प्रकार से अन्य 03 छात्रों ने अपने लेख पढे़ जिनमें मुख्यतः जनसंख्या बृद्वि से शहरों पर पड़ रहे प्रभावों तथा सामाजिक असमानता की बात कही गयी रोहित ने अंाकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि दुनिया में 77 करोड़ लोग ऐसे हैं जो प्रतिदिन 112 रूपये से भी कम कमाते हैं,विश्व में 62 अमीरों के पास 50 प्रतिशत गरीबों से भी अधिक सम्पत्ति है,दुनिया में खाने पीने के संसाधनों में से 86 प्रतिशत खना 20 प्रतिशत लोग खा जाते हैं,दुनिया में करीब 76 करोड़ लोगों के पास पीने का साफ व गुणवत्तापूर्ण पानी नहीं उपलब्ध है,विश्व में अब भी 240 करोड़ लोगों की पंहुच शौचालयों तक नहीं है,भारत देश की आबादी जिस प्रकार बढ़ी है और शहरों का विस्तार हुआ है एंेसे में स्लम बस्तीया ंतो होंगी किन्तु हमें समाज में अमीर गरीब के बीच लम्बी खाई को कम करने के लिए एक दुसरे को सहयोग करके कार्य करना होगा । कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकार व पूर्व छात्र रवि मिश्रा ने कहा कि पत्रकारिता विभाग के विद्यार्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण अवसर मिला है कि वे सीधे क्षेत्र में जाकर स्थिति को देखते हुए कुछ लिख सके हमारे अध्ययन के समय एैसा नहीं था इसी कड़ी में भविष्य की दिशा को लेकर प्राधायापक श्री उमेश शुक्ल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पत्रकारिता के छात्रों के लिए यह फील्ड भ््रामण का अवसर अत्यन्त महत्वपूर्ण रहा है भविष्य में भी हमें मिलकर प्रयास करते रहना होगा । कार्यक्रम के अन्त में विभागाध्यक्ष सी0पी0 पेन्नई ने प्रिया संस्था के प्रति आभार ब्यक्त करते हुए कहा कि यह एक सराहनीय प्रयोग रहा है विद्यार्थियों ने जो प्रस्तुत किया वो बेहतर था हमें आगे भी ऐसे कार्यक्रम करते रहना चाहिए जिससे बेहतर शहर व बेहतर जीवन के सपने को साकार किया जा सके।