ग्राम सभा यानी की गाँव की अपनी सभा | प्रजातंत्र का इससे सुन्दर उदाहरण दूसरा कोई नहीं है | यहाँ चुने हुए प्रतिनिधि नहीं बल्कि लोग स्वयं अपना निर्णय लेते है | पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम-सभा को सबसे ज्यादा अधिकार दिए गए है | ग्राम के 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी नागरिक जिनका नाम मतदाता सूची में हो, ग्राम-सभा के सदस्य है | प्रत्येक सदस्य को ग्राम-सभा में अपने मुद्दे रखने, मुद्दों पर चर्चा करने, सवाल पूछने और फैसलों में भागीदारी करने का अधिकार है | किन्तु हम सभी यह जानते है कि आज अधिकांश स्थानों पर ग्राम सभाओं का कोरम पूरा नहीं हो पाता है एवं कागजों पर इनका आयोजन कर दिया जाता है | किसी भी ग्राम का सामाजिक एवं आर्थिक विकास तभी संभव है जब वहां की ग्राम सभा सशक्त हो |

            कुछ लोग कहते है कि जब ग्राम सभा में लोग ही नहीं आते तो ग्राम सभाओं का आयोजन कैसे करें ! बात तो सच है, बिना लोगों के ग्राम सभा कैसे होगी ? क्या लोग वाकई ग्राम सभा में नहीं आते या इसका कोई अन्य कारण है ? क्या लोगों को ग्राम सभा एवं इसके महत्व की जानकारी है ? क्या कभी किसी ने लोगों को ग्राम सभा में आने के लिए प्रेरित किया है ? ये कुछ ऐसे सवाल थे जो मेरे मन में हिचकोले खा रहे थे | इसी दौरान मुझे 02 अक्टूबर की अनिवार्य ग्राम सभा को अटेंड करने के लिए बाँसवाड़ा जाने का मौका मिला | मैं सामान पैक कर ही कर रहा था कि बॉस का फोन आया.. “देवाशीष बाँसवाड़ा में सभी सचिव, ग्राम विकास अधिकारी और ANM हड़ताल पर है क्या हमें टीम को ग्राम सभा अटेंड करने के लिए भेजना चाहिए ? इन कर्मचारियों की अनुपस्थिति में ग्राम सभा का आयोजन कैसे होगा ?” मैंने कहा.. “सर्, ग्राम सभा तो गाँव के लोगों की अपनी सभा है, इसमें किसी कर्मचारी के उपस्थित होने या न होने से क्या फर्क पड़ता है, मुझे लगता है हमें बिलकुल जाना चाहिए |” मेरा कॉन्फिडेंस देखकर बॉस ने मुझे बाँसवाड़ा जाने की हरी झंडी दे दी और मैं 01 अक्टूबर की सुबह ही बाँसवाड़ा पहुँच गया |

मैंने इससे पहले भी बहुत सी ग्राम सभाओं में भाग लिया था, पर कर्मचारियों के हड़ताल के बीच ये मेरी पहली ग्राम सभा थी | मैंने बॉस से कह तो दिया था कि ग्राम सभा पर कर्मचारियों के हड़ताल का कोई असर नहीं होगा, पर मन थोड़ा सा विचलित था, क्योंकि व्हाट्सएप्प ग्रुप पर कुछ एनिमेटर लगातार यही कह रहे थे की हड़ताल की वजह से ग्राम सभा नहीं हो पायेगी | तभी मुझे एक कहावत याद आई.. “कौन कहता है कि आसमान में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों”, और मैं लग गया व्हाट्सएप्प पर एनिमेटरों को समझाने | पर वो भी कहाँ मानने वाले थे, एक ने कह दिया.. “सर् हमसे तो नहीं हो पायेगा, आप ही आकर ग्राम सभा का आयोजन करके दिखा दीजिए |” अब मन थोड़ा सा और विचलित हुआ, एक अनजान जगह पर, बिना किसी एनिमेटर के सहयोग के ग्राम सभा का आयोजन कैसे करूँ ! फिर मैंने सोचा कि चलो जो भी होगा देखा जायेगा, पर कोशिश तो करते है |

ग्राम सभा के सफल आयोजन के लिए मैंने एक ऐसी पंचायत का चयन किया जहाँ के सरपंच से टीम ने मेरी पहले भी एक बार मुलाकात करवाई थी, क्योंकि एक विवाद के सिलसिले में 6 माह की सजा काटकर आने के बाद वे हमारी परियोजना गतिविधियों में सहयोग नहीं दे रहे थे | अपनी पहली मुलकात में ग्राम पंचायत कुशलपुरा के सरपंच श्री हीरालाल परमार जी से मैंने लगभग डेढ़ घंटे बातचीत की थी और मुझे यकीन था कि उन्हें समझाकर ग्राम सभा का सफल आयोजन करवाया जा सकता है | इस बीच व्हाट्सएप्प पर मुझे एक तस्वीर दिखाई पड़ी, जिसमें बाँसवाड़ा के ही एक अन्य सरपंच यह दर्शा रहे थे कि उनकी ग्राम सभा में 500 लोगों की उपस्थिति होगी | मैंने सोचा, क्यों न इस तस्वीर का उपयोग किया जाये | सुबह-सुबह मैंने हीरालाल जी को फोन किया.. “सरपंच जी नमस्कार, देवाशीष बोल रहा हूँ जयपुर से, पहचाना आपने ?” थोड़ा सोचने के बाद हीरालाल जी ने कहा.. “जी सर्, कहिए कैसे याद किया ?” फिर मैंने उन्हें बताया की मैं 02 अक्टूबर की ग्राम सभा के सिलसिले में बाँसवाड़ा आया हुआ हूँ और उनके ग्राम की ग्राम सभा अटेंड करना चाहता हूँ | मैंने उनसे मिलने का समय माँगा और उन्होंने मुझे 12 बजे ग्राम पंचायत भवन में आने के लिए कहा |

मैं समय से पहले ही ग्राम पंचायत भवन पहुँच गया | हीरालाल जी कहीं निकलने की तैयारी कर रहे थे | पूछने पर उन्होंने बताया की जल्द ही चुनावी आचार संहिता लगने वाली है इसलिए उन्हें कुछ जरुरी कार्य स्वीकृत करवाने के लिए ब्लॉक मुख्यालय जाना है | मैं सोच में पड़ गया की अब क्या करूँ ! फिर मैंने उन्हें व्हाट्सएप्प वाली तस्वीर दिखाई और कहा.. “सरपंच जी ये घलकिया के सरपंच है, इन्होंने ग्राम सभा में 500 लोगों के आने का दावा किया है, इनकी चर्चा जयपुर तक हो रही है, क्या कल होने वाली कुशलपुरा की ग्राम सभा में 500 लोग नहीं आ सकते ?” सरपंच जी ने तस्वीर को गौर से देखा और कहा.. “क्यों नहीं आ सकते ! हमारे यहाँ 500 से भी ज्यादा लोग ग्राम सभा में आ सकते है | पर आज मुझे कुछ काम है, हम अगली ग्राम सभा में इससे भी ज्यादा लोगों को लेकर आयेंगे |” मैंने सोचा यहाँ तो मामला गड़बड़ हो रहा है, फिर कहा.. “सरपंच जी, अगली बार क्यों ? इस बार ही कोशिश करते है न, मैं आपका सहयोग करूँगा | आप अपना काम कीजिए और मुझे सिर्फ 2 आदमी दे दीजिये, जिनके साथ मिलकर मैं ग्राम सभा की तैयारी कर सकूँ |”

हीरालाल जी तुरंत तैयार हो गए और उन्होंने रोजगार सहायक और एक पंच को मेरे सहयोग के लिए लगा दिया | प्रातः 10 बजे का समय ग्राम सभा के लिए निर्धारित किया गया | सर्वप्रथम हमने ग्राम सभा की सूचना जारी की एवं एक व्यक्ति को सभी पंचों एवं ग्राम स्तर पर पदस्थ शासकीय कर्मचारियों को सूचित करने के लिए भेजा | इसके बाद हमने पंचायत की सभी आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से संपर्क करने का प्रयास किया ताकि वे महिलाओं को जागरूक कर उन्हें ग्राम सभा में ला सकें | पर दुर्भाग्य से सारे आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एक ब्लॉक स्तरीय बैठक में गए हुये थे, इसलिए उन्हें मोबाइल पर ग्राम सभा के विषय में जानकारी दी गई एवं उनसे पूछा गया कि कल की ग्राम सभा में वे कितनी महिलाओं को लेकर आएँगी | इस प्रकार उनकी भी जवाबदेही सुनिश्चित की गई | तभी दिमाग में ख्याल आया कि क्यों न स्कूल में सीनियर सेकेंडरी के बच्चों से मिलकर उन्हें ग्राम सभा के विषय में बतलाया जाये | हमने स्कूल के प्राचार्य से संपर्क किया और उन्होंने हमें बच्चों से बातचीत करने की अनुमति दे दी | हमने बच्चों को हंसी-मजाक करते हुए ग्राम सभा एवं GPDP के विषय में बतलाया | हमने उनसे पूछा, क्या आप जानते है प्रतिवर्ष आपकी ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के लिए कितना पैसा आता है ? ये पैसा कौन देता है और ये किसका पैसा है ? आपके ग्राम के विकास की योजना एक व्यक्ति द्वारा या सभी को मिलकर बनानी चाहिए ? बच्चों ने स्वयं ही इन प्रश्नों के उत्तर दिए | वे यह जानकर अचंभित थे कि उनके ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के लिए प्रतिवर्ष लगभग 75 लाख से 1 करोड़ रुपये तक आते है | हमने बच्चों से यह वादा लिया कि वे घर जाकर ग्राम सभा एवं GPDP के विषय में अपने अभिभावकों (पेरेंट्स) से बात करेंगे |

शाम के 5 बजने वाले थे और हीरालाल जी भी ब्लॉक मुख्यालय से अपना काम निपटाकर ग्राम पंचायत भवन में पधार चुके थे | हमें देखते ही उन्होंने पूछा.. “कितनी प्रगति हुई ?” मैंने कहा.. “प्रगति तो हुई है सरपंच जी, पर अभी हमें और लोगों से मिलना होगा | क्यों न आप और मैं लोगों के घर पर चले और उन्हें कल की ग्राम सभा के लिए आमंत्रित करें | चुनाव के समय तो हर सरपंच वोट मांगने जाता है, पर आप पहले सरपंच होंगे जो लोगों को ग्राम सभा के लिए घर-घर जाकर आमंत्रित करेगा |” सरपंच जी को मेरी बात पसंद आई और वो बाइक पर मुझे लेकर ग्राम संपर्क के लिए निकल पड़े | वे मुझे अपने साथ कुछ मुहल्लों में लेकर गए और लोगों को अधिकाधिक संख्या में ग्राम सभा में आने के लिए आमंत्रित किया | अब तक शाम के लगभग सात बज चुके थे, अंधेरा होने लगा था, परन्तु अब भी बहुत से मुहल्ले शेष थे | मैंने हीरालाल जी से कहा.. “सरपंच जी, मैं सोच रहा हूँ की आज रात गाँव में ही रुक जाऊ, रात में लोगों से मिलकर ग्राम सभा पर चर्चा भी कर लूँगा |” सरपंच जी सोच में पड़ गए, फिर बोले.. “आपके रुकने की व्यवस्था तो मैं करवा दूँगा, पर मैं खुद आज रात गाँव में नहीं हूँ | मुझे एक इंजीनियर से मिलने बाँसवाड़ा जाना है | मैं आपके साथ थोड़ी देर और घूमता हूँ, फिर आप मेरे साथ बाँसवाड़ा चले चलियेगा | सुबह जल्दी आ जायेंगे |” मैंने हीरालाल जी की बात मान ली तथा कुछ और मुहल्लों में समुदाय के साथ बैठकें की | रात में लगभग 9 बजे आसपास हम बाँसवाड़ा पहुंचे |

अगले दिन सुबह-सुबह हीरालाल जी ने मुझे फोन कर बताया कि किसी आवश्यक कार्य की वजह से वे मेरे साथ कुशलपुरा नहीं जा पायेंगे | उन्हें आने में देर लगेगी, इसलिए मैं स्वयं अपने साधन से चला जाऊ | उन्होंने मुझे उपसरपंच जी का नंबर दिया और कहा कि उनकी अनुपस्थिति में वे मेरा सहयोग करेंगे | प्रातः 8 बजे ही मैं ग्राम पंचायत के अटल सेवा केंद्र पर उपस्थित था | उपसरपंच एवं कुछ अन्य पंचों के साथ मिलकर मैंने पुनः लोगों से संपर्क आरंभ किया | एक व्यक्ति को दोबारा सभी आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को फोन करने की जिम्मेदारी दी गई | ग्राम में संपर्क के दौरान लोगों ने मुझे बताया की उनके बच्चों ने उन्हें आज की ग्राम सभा के विषय में बतलाया है | यह जानकर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हुई और मैं लोगों को साथ लेकर ग्राम पंचायत भवन की ओर चल पड़ा | 10 बज चुके थे, लोगों का आना प्रारंभ हो चुका था, पर सरपंच जी अभी तक नहीं आ पाए थे | मैंने उन्हें फोन किया और बताया की लगभग 50 लोग अटल सेवा केंद्र पर ग्राम सभा में शामिल होने के लिए आ चुके है और उनके बारे में पूछ रहे है | उन्होंने मुझसे कहा की आप लोगों के साथ बातचीत आरंभ कीजिए, मैं 11 बजे तक आ जाऊंगा तथा रस्ते में और लोगों को बोलता हुआ भी आऊंगा | ग्राम सभा में उपस्थित लोगों से अनुमति लेकर मैंने उनसे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा GPDP पर चर्चा आरंभ की | धीरे-धीरे लोगों की संख्या बढ़ रही थी | इसी बीच लगभग 11:30 बजे हीरालाल जी भी आ गए और 205 लोगों (85 महिला एवं 120 पुरुष) की उपस्थिति में 02:30 घंटे तक ग्राम सभा में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा GPDP आदि पर विस्तृत चर्चा हुई |

ग्राम सभा के समापन के बाद मैंने एवं सरपंच जी ने सभी लोगों को ग्राम सभा में आने के लिए धन्यवाद् दिया | इस बीच हीरालाल जी के पास लगातार फोन आ रहे थे | मैंने पूछा.. “क्या हुआ सरपंच जी ?” हीरालाल जी ने कहा.. “कुछ नहीं, आपने आग लगा दी है | लोग फोन करके मुझसे पूछ रहे है की ग्राम सभा में हिस्सा लेने के लिए हमें क्यों नहीं बुलाया गया |” और हम दोनों हँस पड़े | 02 अक्टूबर की ग्राम सभा के इस सफल आयोजन से एक बात तो साफ है, कि यदि लोगों को ग्राम सभा का महत्व समझाया जाये, उन्हें ग्राम सभा के एजेंडे के बारे में पूरी जानकारी दी जाये, उन्हें ग्राम सभा में आने के लिए आमंत्रित किया जाये तथा निर्णय प्रक्रिया में उन्हें भागीदार बनाया जाये, तो कभी भी ग्राम सभा का कोरम खाली नहीं जायेगा | क्या अब भी आप कहना चाहेंगे कि “ग्राम सभा में लोग नहीं आते !”