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महिला हुई तो क्या हुआ

Renu Joshi is a ASHA worker in Barmer district Rajasthan. It has been a personal learning journey for her to gain confidence. Supported by PRIA she now feels no hesitation in holding the sarpanch accountable for improving the health in her village -- from providing safe driking to making the VHSNC functional. Renu is now championing for a planning meeting to prepare the Gram Panchayat Development Plan of her village. Being a woman is no barrier to success, she says.


महिला हुई तो क्या हुआ आषा बनकर समाज के हित व जन कल्याण के लिए कार्य तो कर सकती हूॅ ।

मूलतः बाड़मेर में अपने माता पिता के साथ रहने वाली रेणु (25) वर्ष का आज से तीन वर्ष पूर्व विवाह सिवाना कस्बे के हिंगलाज काॅलोनी में रहने वाले महेन्द्र जी के साथ सम्पन्न हुआ था। विवाह के बाद अपने माता पिता को छोड अपने जीवन की नई शुरूआत करने के लिए अपने पति के साथ सिवाना आई। पति मजदुरी का कार्य करते है। पति के अच्छे स्वभाव व खुद के अच्छे स्वभाव के कारण इन्होनें अपने पति के साथ अपने ससुराल वालो का भी दिल जीत लिया। एक अच्छे परिवार से तालुक रखने वाली रेणु जी का जीवन किसी फिल्म की कहानियो की तरह ही है। उन्होने अपने जीवन में कई मुसीबतो का सामना करते हुए इन पर विजय प्राप्त की है। वर्तमान समय में महिलाओ का घर से बाहर भी निकलना गलत माना जाता है। लेकिन इन्होने इस परम्परा को तौड़कर एक नई मिसाल कायम की है। इनके पति का मजदुरी का कार्य कम ही चलता था जिससे घर परिवार का गुजारा भी मुषकिल से हो पाता था। अपने घर व अपने पति की दयनीय हालत को देखकर उन्होने अपने पति से बंद जुबान में आषा पद पर लगने व परिवार के इस विकट मौड में साथ देने के लिए अपने पति से कहा। पति को अपनी पत्नी पर पूर्ण भरोसा था। पति ने उन्हे इस पद पर लगने को कह दिया और कहा कि मुझे तुम पर विष्वास नहीं पूर्ण भरोसा भी है। तुमने इस संकट की घडी में जो यह बात कही वो भी मेंरी लिए काफी है। मैं तुम्हारे इस कार्य में साथ दूंगा। पति के इस जवाब को सुनकर उसकी आंखो में खुषी के आंसु आ गए। फिर उन्होने आषा के पद पर नियुक्ति ली।

Renu Joshi, ASHA worker, Barmer, Rajasthan

आज की महिला इस अवस्था में अपने समाज के लोक लाज लज्जा के कारण किसी कार्य को करने से पहले हिचकिचाहट या असहज महसूस करती है ,बजाय समाज की समझ या सेवा करने से लेकिन इन्होने मुष्किल कार्य को भी आसान बना दिया।

बाड़मेर में ही इन्होने राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल से 10 वीं कक्षा पास की। इन्होने बताया कि मैं अपने माता पिता का धन्यवाद देती हूॅ कि जो उन्होने मुझे पढाया लिखाया इस लायक बनाया कि मैं विपदा के समय अपने परिवार के साथ रहकर मैं उनकी मदद कर सकूं। उनकी हरसंभव मदद कर सकू।

1 से 2 मई 2017 को पंचायत समिति के हाॅल में हुये दो दिवसीय प्रषिक्षण के दौरान मुझे प्रिया संस्था के बारें में पता चला और पहली बार संस्था के प्रतिनिधीयों से मुलाकात हुई। उसमें मुझे स्वास्थ्य को लेकर अच्छी जानकारी मिली जो मुझे पहले पता नहीं थी। एक सच कहूं कि मुझे पहली बार अहसास हुआ कि हम औरते कितना काम करती है पर इसकी गिनती नहीं होती है सुबोध जी ने काम के आधार पर जब एक दिन का समय विभाजन कराया गया तो पता चला कि हम औरतें अपने लिये जरा भी समय नहीं दे पाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात मुझे इस बात का पता चला कि हमारे क्षेत्र में जच्चा और बच्चा की जो मौते हो रही है। उसको कम करने के लिए एक आषा होने के नाते मुझे क्या करना चाहिए।

प्रिया संस्था के सुबोध जी ने एक बहुत अच्छी बात कही जो आज तक मेरे दिल मे समाई हुई है। उन्होन कहा था कि सबसे पहले सुधार या परिवर्तन की शुरूआत अपने आप से, अपने घर से होती । घर के बाद परिवार ,परिवार के बाद समाज तक उस परिवर्तन के कार्य को धीरे धीरे पूरा किया जा सकता है। उसी दिन मैंने एक प्रण लिया कि मुझसे जितना हो सकेगा उतना मैं टीकाकरण से वंचित बच्चो को टीका करवाने में जो करना होगा वो मैं कंरूगी। समाज के जागरूक लोगो ,पंचायती राज सदस्यो, चिकित्सा विभाग के सदस्यांे को साथ में लेकर, इनको कम करने का प्रयत्न करूंगी और समाज के लिए अच्छा कार्य करूंगी।

Renu Joshi, ASHA worker, Barmer, Rajasthan

प्रिया के साथियों से मिलने से पहले तक मैं कभी सरपंच से न तो मिली थी और न ही हिम्मत होती थी और जिस आंगनवाडी सेन्टर में मेरी ड्यूटी थी वहां पर मूलभूत आवष्यकताओं का अभाव था पर सरपंच से मिलना तो मैं बात करने की सोच भी नहीं सकती थी। मुझे डर लगता था कि मैं उनसे बात कैसे करूंगी। वो क्या सोचगी। मैं किस तरह उनके सवालो का जवाब दे पाउंगी। ढेर सारी बाते मैंरे मन में आ रही थी। जिसका जवाब मैंरे पास नहीं था। लेकिन प्रिया संस्था के ललित जी व हनीफ जी ने मेरे पास आकर मेरा हौंसला बढायां और सुबोध सर से मेरी बात करवाई तो सर ने भी कहा कि अपने हक के लिये किसी से भी करने मेें घबराना नही चाहिये अगर कुछ होगा तो वो मेरे साथ खडे है। इसके बाद फिर मैने सुबोध जी से बात की और हिम्मत कर मैने सरपंच पति को फोन कर दिया जैसे ही उधर से आवाज आई कि मैं टाईगर बोल रहा हूं मेरे हाथ से मोबाईल छूट गया और मैने फोन काट दिया। अगले दिन सुबोध जी के कहने पर ललित जी और हनीफ जी मुझको सरपंच केे घर लेकर गये और वहां पर फिर मैने बहुत सारी बातें की। अब मुझे जरा भी संकोच या डर नहीं लगता है मैं सरपंच साहब से नियमित अन्तराल पर बातें कर ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पेयजल एवं पोषण समिति के गठन के साथ साथ ग्राम पंचायत स्तर पर एक प्रषिक्षण आयोजित कराने का प्रयास कर रहीं हूॅ। प्रिया का शुक्रिया और इनके प्रतिनिधी का भी। उन्होने मेंरा आत्मविष्वास बढाने में मेरी मदद की। मेरे आंगनवाडी सेन्टर की समस्या बताते बताते मुझे पता ही नहीं चला कि मैं किसके साथ बातचीत कर रही हूॅं। यह मेरे जीवनकाल का अविस्मरणीय दिवस था। जिसे मैं जिन्दगी भर तक याद रखूॅगी। जो यह दिन मुझे प्रिया संस्था के सहयोग की वजह से मिला। मैं ताउम्र प्रिया संस्था को याद रखूुगी।

 

 

 

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