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Feature Story                                

प्रिया के साथ काम करनें का मेरा अनुभव और विचार

PRIA is working with local communities in the blocks of Siwana and Samdari in Barmer district of Rajasthan to help them engage with issues related to Maternal and Adolescent health. The aim is to facilitate the creation of participative Gram Panchayat Health Sub-plans which will be part of the overall Gram Panchayat Development Plan (GPDP). The effort is to create an environment where this work can become a model for developing participative planning, ushering in health reforms in rural Rajasthan.

Our animators are the hands and feet of our work in the field. They have been recruited from the local areas where the work is being implemented. Their local knowledge is their greatest asset, which they use to build an environment of trust with the communities. Capacity building of animators is an important part of our work, to enable them to sustain the change beyond the project implementation period.

Lalit Sharma, working in Kathadi gram panchayat, Siwana, Rajasthan, writes about how he relates his work to his family and life till date. He makes some very poignant observations about the large gaps that still exist in maternal health despite the country having achieved 70 years of freedom from colonialism. He talks about gaining confidence in his work as he observes how the PRIA local staff engage with different actors and learns from them. This reflects the growth of an individual in the face of difficult circumstances.

  

मैने प्रिया के साथ जुडने से पहले जन जागरण सेवा समिति, बूंदी में सर्व शिक्षा अभियान के तहत दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास को बढाने के लिये कार्य किया था। इसके बाद मैने एक स्कूल में बच्चों को पढाने का कार्य किया। इन दोनों कार्याें के दौरान मैं किसी न किसी रूप से बच्चों के साथ जुडा रहा। फरवरी 2017 में मेरे एक सहयोगी की सहायता से प्रिया के साथी से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे प्रिया संस्था व इसके द्वारा किये जा रहे कार्यो के बारें में बताया। चूॅकि मैं पहले इस सेक्टर में कार्य कर चुका था अतः मैनंे प्रिया के साथ जुडने का मानस बना लिया और 20 मार्च 2017 को प्रिया संस्था को फील्ड एनिमेटर के रूप में जुड गया।

सुबोध सर के साथ मैने लगातार 4-5 दिन की सिवाना की ग्राम पंचायतों में घूम कर सरपंच, वार्ड पंच, आशा आदि के साथ बात करने का तरीका और प्रोजेक्ट के बारें में सीखने को मिला। इसके बाद सर ने मुझे दो दिन तक संस्था और इस कार्यक्रम से जुडी प्रत्येक जानकारी दी। इसके बाद मैने फील्ड में अकेले जाना प्रारम्भ किया।

फील्ड में जाने के दौरान मुझे महसूस हुआ कि आजादी के इतने सालों के बाद भी ग्रामीण क्षेत्र में उतना परिवर्तन नहीं हो पाया जितना कि होना था। गावों मे आज भी लडकियो की शिक्षा, महिलाओं के अधिकार, स्वतन्त्रता और उनके बोलने की आजादी भी आज भी नहीं है। जबकि मैं महिला सरपंच से मिलने की कोशिश करता उनके पति ही सामने आते थे। मैं बहुत कोशिश करनसे के बाद भी महिला सरपंच से नहीं मिल पाता। जब भी सरपंच या सरपंच से बात करता तो लगता था कि महिला और बच्चों के स्वास्थ्य का कोई महत्व उनकी नजर में नहीं है। मुझे यह सब अजीब लगता था कि मैं सोचता था कि जब पतियों को ही सारा काम करना है तो इसके लिये महिलाओं को सीढी क्यों बनाया गया। चूंकि पहले कभी भी इस तरह गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिये समुदाय और सरपंचों के साथ मैने काम नहीं किया था, इसलिये कभी कभी सरपंचो के व्यवहार और उनकी सोच से मुझे काफी अजीब लगता था।

इसके बाद मुझे एक प्रशिक्षण के लिये जयपुर जाने का मौका मिला । वहां पर जाकर मुझे बहुत अच्छा लगा। मैने वहां पर कार्यक्रम की समझ के साथ मेरंे आत्मविश्वास में बहुत बढोत्तरी हुई। किसी प्रशिक्षण में जयपुर जाने का यह पहला मौका था। मेरा वहा पर घूमने का भी मन था पर समय की कमी होने के कारण नहीं घूम पाया। मैंने संस्था के जयपुर आॅफिस में जाकर आदित्य सर, नईम सर आदि के साथ बासंवाडा से आये प्रवीण और सोनिका जी से बात की। मुझे संस्था के साथ कार्य करते हुये 2 माह से ज्यादा का समय हो गया है और यहां आकर मैं प्रतिदिन कुछ न कुछ नया सीख रहा हूं।

मुझे यहां पर आकर समाज के प्रत्यके वर्ग के लिये कुछ करने का और उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने के लिये काम करने का मौका मिल रहा है। मेरे अन्दर अब इतना आत्मविश्वास आ गया है कि मै बहुत सारे लोगों के सामने अपनी बात को रख सकता हूं। इस कडी में बाल विवाह के विरोध में आयोजित होने वाली पचांयत समिति में होने वाली एक बैठक मैं भाग लिया। जिसमें सरसपंचों के अलावा, प्रधान, विकास अधिकारी, सी.जे.एम, ग्राम सेवक आदि ने भाग लिया। वहां पर इतने अधिक लोगों के सामने मैने पहली बार अपने विचार रखे थे। सबने जब तालिया बजाई तो मुझे यह पल कभी नहीं भूल सकता।

आने वाली ग्राम पंचायतो में सभी टैंªनिग मै खुद करवाउंगा। अब तक के सफर के दौरान प्रिया के साथ जुडकर मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहा हू।

 

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