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पंचायती राज व्यवस्था

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भारतीय सविधान में पंचायतो को स्थानीय स्वशासन संस्थानों का दर्जा दिया गया है |ग्राम सभा एस व्यवस्था की आधारभूत इकाई है जो निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करती है | प्रिया ने ग्राम सभाओ को अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों से अवगत कराने तथा उनकी कार्यवाही को सुचारू बनने के लिए देः भर  की ६,८६५ पंचायतो में अभियान चलाया | इस अभियान में युवाओ ,महिलायों ,दलितों और आदिवासियों को ग्राम सभा की कायवाही व निर्णय प्रक्रिया में सार्थक हिस्सेदारी  के  प्रेरित करने पैर जोर दिया गया है | 

इसके अलावा प्रिया ने ६८५ गावो में पंचायत स्थर पर सुच्म  योजनाओ  की तैयारी  पर भी मदत दी है | इस कोशिश का मक्सद यह सुनिश्चित करना था की लोगो के असली मुद्दों को प्राथमिकता  मिले | संस्था के इन प्रयासों के फलस्वरूप ,अब ज्यादातर राज्य सरकारों ने नीचे से ऊपर की दिशा में केंद्रित पध्यति को अपनाना सुरु केर दिया है |अब स्थानीय विकास के उद्देश्य से सहेभागिता    विचार - विमर्श ,नियोजन और निगरानी के लिए ग्राम शभा को एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जाने लगा है |

बहुत सरे निर्वाचित जनप्रतिनिधि  जीवन में पहेली बार सार्वजनिक दायित्व वाले पदों पर आए है |इन नए नेताओ का jhamtavardhan करना बहुत आवश्यक है | इस दिशा में प्रिया ने  कई अभिनव प्रयास किए है | इस दौरान प्रिया की और से १,२०,००० निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिझित किया गया | इनमे से ६६५१४ (अर्थात आधे से ज्यादा ) महिलाये और १७,५७० दलित पंचायत पदाधिकारी थे | ७३ ब्लाक स्तरीयपंचायत संसाधन केन्द्रों के जरिये इन निर्वाचित प्रतिनिधियों को लगातार सहायता और मार्ग दर्शन दिया जा रहा है |
 

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