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प्रिया के बारे में सत्तर्वे दशक का उत्तराद्व राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर विकासीय मानदंडो व तरीको की गंभीर आलोचना का गवाह रह चुका है | भारत सहित अन्य विकासशील देशो की जमीनी वास्तविक्तायो से यहे साफ हो चुका है कि सरकारे प्रसागिक और सतत विकास के कार्यक्रम देने में सझम नहीं रहे थी | वही स्थानीय स्तरके पहेले से लोगो में जागरूकता बढ़ाने और समुदाय को मोबालाइज करके उन्हें अपनी विकास प्रक्रियाओ में सहभागी बनाने में काफी सफलता मिली |
१९८२ में इसी माहोल में , प्रिया अपने अस्तित्व में आई | इसके संस्थापको ने विकास के दो सिद्दांतो पर विश्वास किया :
- सहभागी शोध लोगो के सशक्तिकरण में उनके ज्ञान का आधार भूत महेत्ता पर विश्वास रखता है |
- सहभागी विकास एक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत लोगो को अपनी विकासीय योजनाओ के नियोजन और कार्यान्वयन हेतु सशक्त किया जाता है |
सहभागिता के ये दोनों सिद्दांत विभिन्न स्तरों व संधार्भो में प्रयुक्त किये गए :
- महिलायों कि शिक्षा व उनकी आजीविका
- वन और आदिवासी अधिकार
- मजदूरों कि शिक्षा और व्यावसायिक स्वास्थ्य
- साक्षरता औए सतत शिक्षा
ग्रासरूट स्तर पर अपने कार्यो के दौरान प्रिया वंचितों के सशक्तिकरण के लिए कई कार्या प्रणाली और तरीके इजात करने में अग्रणी रहे है :
- सहभागी प्रक्षिक्षण
- सहभागी अनुश्रावन व मूल्याकन
- बहु साक्षेदार संवाद (मल्टी स्टेक होल्डर डायलौग )
- समुदाय आधारित अनुश्रावन
प्रिया के अपने १० वर्षों के ग्रासरूट के साधन अनुभवों से यह बात निकल कर आती है कि हमारे अपने समाज सहित कई अन्य लोकतान्त्रिक समाजो कि अनेको बीमारियों कि जड़ सु - अभिशासन का आभाव है | प्रिया के परिप्रेक्ष्य से इनका एक मात्र उपाय यही दिखता है | कि जागरूकता पैदा करने हेतु नागरिक वचनबद्यता बढाई जाये , सहभागिता प्रबल की जाये और अभिशासन की प्रक्रियों का लोकतांत्रिकरण किया जाये |
प्रिया का विजन समानता और न्याय के मूल्यों के आधार पर एक लोकतान्त्रिक समाज विकसित करना है
स्थानीय स्तर पर सीधे रूप से प्रिया ६ राज्यों यथा आंध्र प्रदेश ,छत्तीसगढ़, हरियाणा ,हिमांचल प्रदेश , झारखण्ड , और राजस्थान में हस्तक्षेप करती है |अपने मुख्या सहयोगियों के सहयोग से प्रिया के हस्तक्षेपों की यहे पहुच बिहार , गुजरात , केरल , मध्य प्रदेश , उडीसा , उत्तरांचल , उत्तर प्रदेश राज्यों में भी है | प्रत्येक राज्य में प्रिया के हस्तक्षेप प्रसागिक मुद्दों व विषयों से इस तरह जुड़े हो की प्रभावी व जवाबदेह स्थानीय अभिशासन के माध्यम से निम्न विकासीय लक्ष्यों की सुनिश्चतता किया जा सके | अपने लक्ष्य को आगे बढाते हुए प्रिया विभिन्न स्तरों पर संस्थागत सुधारहेतु कार्यरत है - राज्य निर्वाचन आयोग , राज्य वित्त आयोग और जिला नियोजित समिति
'ज्ञान ही शक्ति है ' का आधार मानते हुए प्रिया ज्ञान का भंडार है | नै सदी में प्रवेश करते हुए हम नीतियों , संस्थानों व क्षमातायो के प्रोह्त्सन द्वारा ग्रासरूट सशक्तिकरण की अपनी प्रतिबद्दता को सुद्रण करते है | |
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